जादुई नगरी (हिंदी नैतिक कहानी)

आज मैं एक जादुई शहर की कहानी बताने जा रहा हूं जिसमें कई परियां रहती थीं। उनमें एक रानी परी रहती थी तथा एक सोनपरी नाम की भी परी रहती थी । यह  हिंदी  कहानी उन्हीं परियों की कहानी (fair tales in Hindi) पर आधारित है आगे पढ़कर आपको बहुत आनंद आने वाला है।

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 जादुई नगरी (moral stories for childrens in hindi)


बहुत समय पहले एक जादुई नगरी हुआ करती थी। जादुई नगरी में बहुत सारी परियां रहा करती थी ।सभी परियों की एक रानी भी थी।
सारी परियां रानी परी की बात माना करती थी । सभी परियों में से एक परी का नाम सोनपरी था।

सोनपरी  जादुई नगरी में रह रह कर परेशान हो चुकी थी। इसलिए वह अब जादुई नगरी में रहना नहीं चाहती थी।रानी परी को इस बात की  जरा भी भनक नहीं थी । न हीं सोनपरी ने इस बारे में किसी को बताया था ।

जादुई संदूक

एक दिन की बात है --- सोनपरी रानी परी के पास आ रही थी क्योंकि उसे रानी परी से कुछ बातें करनी थी ।  तभी सोनपरी ने देखा की रानी सिंहासन पर नहीं है ।
 सोनपरी ,रानी परी को चारों ओर ढूढने लगी , ढूंढते -ढूंढते सोनपरी को रानी परी की आवाज सुनाई दी ।

सोनपरी आवाज का पीछा करने लगी और फिर रानी परी के पास पहुंच गई ।
रानी परी एक बहुत बड़े संदूक के पास खड़ी थी और कुछ बोल रही थी ।  सोनपरी एक कोने में छुप गई और रानी परी क्या कर रही है यह देखने लगी ।

 संदूक खुल गया और रानी परी अपने हाथ में एक पोटली रखी हुई थी उन्होंने उस पोटली को संदूक में डाल दिया और वहां से चली गई।
 सोनपरी कुछ समझ नहीं पाई। वह भी संदूक के सामने आई। वह  कोशिश करने लगी वही बोलने की जो रानी परी कह रही थी और बहुत बार प्रयास करने के बाद भी संदूक नहीं खुला ।

 सोनपरी थक कर चली गई और अगले दिन जब रानी परी वहां जा रही थी तो सोनपरी ने रानी परी का पीछा किया ।
रानी परी संदूक के सामने आई और संदूक को खोलें और संदूक खोलते ही संदूक से आवाज आने लगी- कोई आया था ।
 फिर रानी परी ने पूछा ---कौन आया था?

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सोनपरी ने ध्यान ही नहीं दिया था कि यह जादुई नगरी का संदूक है यह तो यह भी जादुई संदूक होगा।
संदूक में शीशा लगा हुआ था अगर कोई भी इंसान संदूक के सामने आता है या उसे खोलने की कोशिश करता है तो उस इंसान की छवि शीशे में दिखाई देने लगती है ।

रानी परी ने शीशे में सोनपरी की तस्वीर देखी और यह देखते ही वह गुस्से में आ गई ।
सोनपरी सभी चीजों को छुप छुप कर देख रही थी । यह सब देखकर सोनपरी वहां से भाग गई ।

 रानी परी अपने सिंहासन पर बैठी और सोनपरी को सामने प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

सोनपरी को जाल में फंसाने की कोशिश

 सोन परी रानी परी के पास नहीं आ रही थी। लेकिन सभी कैसे भी रानी परी के सामने सोनपरी को लेकर आई और रानी परी ने सभी को वहां से जाने के लिए कहा। और कहा कि उसे कुछ जरूरी बात करनी है।

सोन परी को छोड़कर और सब वहां से चले गए ।
रानी परी ने सोनपरी से पूछा---- कि उसे क्या जरूरत थी संदूक के पास जाने की ।
सोनपरी ने रानी परी से कहा--- कि उसे इस जादुई नगरी में नहीं रहना है और रानी परी ने कहा कि बस इतनी सी बात थी ।
 और रानी परी ने सोनपरी से कहा ---कि वह उसे कहीं दूर भेज देगी जहां वह जाना चाहती है। सच में यह बहुत खुशी की बात है मैं कल होने का इंतजार अभि से कर रही हूं।

कल होते ही रानी परी ने सोनपरी  को कहा--- कि वह उसके साथ चले। सोन परी रानी परी के साथ साथ जाने लगी और वह जाकर समुद्र के किनारे रुकी ।

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 वहां पर एक बहुत बड़ा सा नाव था। रानी परी ने सोनपरी को उस नाव पर बैठने के लिए बोली । सोनपरी नाव में बैठ गई। रानी परी ने कहा ख्याल रखना अपना ।
जी मैं  अपना ख्याल रखूंगी आपका बहुत-बहुत शुक्रिया

नाव आगे बढ़ गई । अब सोनपरी नजर नहीं आ रही थी ।
जैसे ही नाव वहां से गई रानी परी जोर जोर से हंसने लगी और बोली -जाओ जाओ अपना ख्याल रखना ।

अब सोनपरी थी भी या नहीं किसी को पता भी नहीं था । यह एक जाल थी सोनपरी को हमेशा हमेशा के लिए खत्म करने के लिए।
वह जादुई समुद्र था जैसा कि रानी परी ने समुद्र को कहा था नाव को डूबा देने के लिए । समुद्र ने बिल्कुल वैसा ही किया ।

रानी परी वापस से संदूक के पास गई संदूक को खोलना चाहा लेकिन संदूक खुला ही नहीं । रानी परी वही बोल रही थी जो वह आज तक बोलती थी लेकिन बहुत कोशिशों के बावजूद संदूक नहीं खुला ।
रानी परी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर संदूक खुल क्यों नहीं रही ।

आखिर रानी परी ने एक आवाज सुनी वह आवाज सोनपरी की थी।

उधर से आवाज आई ----तुम सभी को रानी परी की सच्चाई बताना चाहती हूं कृपया मेरी बात सुनो
 मेरे पास सबूत भी है।  कृपया मेरी बात सुनो।

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रानी परी सोनपरी को देखकर हैरान रह गई क्योंकि रानी परी ने खुद ही उसे नाउ पर बिठाया था।

रानी परी ने कहा--- यह क्या बोले जा रही हो तुम -तुम्हें पता भी है तुम किसके खिलाफ बातें कर रही हो।

 हां रानी परी मुझे सब कुछ पता है।
 चलो मेरे साथ सभी मेरे साथ चलो। सभी परियां सोनपरी के साथ जाने लगी ।
सोनपरी उन लोगों के साथ गई। सोनोरी तुरंत संदूक के सामने आई और संदूक खोलें ।

 और संदूक को खोलते ही सभी ने देखा कि संदूक के अंदर सभी परियों की जादुई पत्थर रखी हुई थी
देखो इसे ----रानी परी हम सभी के जादुई पत्थर चुरा कर अपने पास रखी हुई है।

परियों को मिला उनका जादुई पत्थर

 सभी ने अपना अपना पत्थर उस संदूक से उठा लिया । अब पूछो सभी रानी परी ने क्यों सभी के पत्थर चुराए।

रानी परी कुछ समझ नहीं पा रही थी कि यह सारी चीजें सोनपरी को कैसे पता चली ।

जब रानी परी ने सोनपरी को संदूक के शीशे में देखा । तो सोनपरी  वही छुपी हुई थी।

 जैसे ही सोनपरी को पता चला कि रानी परी को पता चल चुका है कि वह सोनपरी ही है जो संदूक को खोलना चाह रही थी । उस समय सोनपरी वहां से छिप कर भाग गई ।
लेकिन जैसे ही रानी परी वहां से गुस्से में बाहर गई तभी सोनपरी दोबारा से संदूक के पास आई।

इस बार उसने वह मंत्र बहुत अच्छे से सुन लिया था । उसने मंत्र की मदद से संदूक को खोल लिया ।

संदूक खुलते ही सोनपरी ने सभी परियों के जादुई पत्थर को देखा ।
जादुई पत्थर की मदद से ही सभी परियां अपनी शक्तियों वापस प्राप्त कर सकती थी

हर 5 साल बाद परियों की शक्तियां जाने लगती थी तब सभी परियां जादुई पत्थर की मदद से अपनी शक्तियां वापस प्राप्त कर लेती थी ।
लेकिन रानी परी सभी के जादुई पत्थर ही चुरा कर ले आई थी
पत्थर को हटाते ही सोनपरी ने एक चिट्ठी देखी।

उस चिट्ठी में लिखा था अगर रानी परी के पास सभी परियों की जादुई पत्थर आ जाती है तो रानी परी सभी परियों से ज्यादा शक्तिशाली बन जाएगी

सोनपरी समझ गई थी कि रानी परी क्या चाह रही थी। रानी परी सभी परियों की शक्ति को अपनी शक्ति बनाना चाह रही थी ।
इसलिए सोनपरी ने एक योजना बनाई सबसे पहले सोन परी ने संदूक खोलने के मंत्र को ही बदल डाला।

जिससे कि वह संदूक खोलें मंत्र बदलने के कुछ ही समय बाद रानी परी ने सभी को आदेश दे दिया था कि सोनपरी को उनके सामने लाया जाय।

सोनपरी वहां से निकल गई और रानी परी के पास पहुंची ।
वहा रानी परी को झूठी बातें बोली  ताकि वह बच जाए।
सोनपरी जानती थी कि रानी परी जो बोलेगी वह कर देगी इसलिए वह रानी परी से कह दिया कि वह जादुई नगरी में नहीं रहना चाहती है ।

परियों की आजादी

 जब रानी परी उसे उस नाव में बिठा कर चली गई थी तभी सोनपरी अपनी शक्तियों से उस नाव से उतर गई थी
तभी सोनपरी ने रानी परी के उस करतूत को सभी के सामने लाने की योजना बना चुकी थी
सोनपरी ने सारी सच्चाई सभी परियों को बता दी।

रानी परी के पास कोई शब्द ही नहीं थे। वह बिल्कुल चुपचाप खड़ी थी ।
                        

                         fair tales in hindi

सभी ने रानी परी से उस की उपाधि छीन ली और उसे वहां से जाने के लिए कह दिया।

रानी परी चुपचाप वहां से चली गई।
फिर  सोनपरी ने कहा---- आज से हम किसी के अधीन नहीं
हम जहां चाहे वहां जा सकते हैं ,जो चाहे वह कर सकते हैं 
जरूरी नहीं कि सभी इस जादुई नगरी में रहे । जिसे जहां जाना है वहां जा सकते  हैं।

यह सुनकर सारी परियां बहुत खुश हुई।



यह कहानी बच्चों की नैतिक कहानियों (moral stories for childrens in hindi) पर आधारित है। आशा है कि कहानी पढ़कर आपको बहुत पसंद आया होगा। इसी तरह की हिंदी कहानियाँ(hindi kahaniyan) और मोरल कहानी(moral stories in hindi) पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट को बुकमार्क करें। धन्यवाद!

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