कुम्हार की सफलता (moral stories in hindi)


इस हिंदी नैतिक कहानी (moral stories in hindi) में मैं आपको बेतोर गाँव के दो कुम्हारों की सफलता और असफलता की कहानियाँ बताने जा रहा हूँ कि कैसे एक अधिक सफल होता है और एक असफल कुम्हार होता है जबकि दोनों एक ही पेशे में हैं।
 इस कहानी को पढ़कर आपको नीचे एक अच्छी नैतिक शिक्षा(moral lesson) मिलती है। उम्मीद है यह कहानी आपको जरूर पसंद आएगी। 

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moral stories in hindi

बेटर गांव की दो कुम्हार की कहानी (hindi kahaniyan)

बेटर गांव में भोलू नाम का एक कुम्हार रहता था । वह इस बात से दुखी होता है कि वह जो भी करता है, उसमें असफल हो जाता है।
 जबकि उसी गांव का रामलाल कुम्हार अपने हर काम में सफल हो जाता है। जिसकी वजह से उसके पास बहुत पैसा है और भोलू के जीवन में हमेशा गरीबी रहती है।
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एक दिन उसकी पत्नी बोली---- क्या हुआ बड़े उदास लग रहे हो?
भोलू बोला---- उदास की ही तो बात है ,समझ नहीं आता मुझे इतनी मेहनत करने के बाद सफलता क्यों नहीं आती। हर बार कोई न कोई कारण होता है, जिससे मैं अपने काम में फेल हो जाता हूं ।

उसकी पत्नी बोली ----कहीं किसी की नजर तो नहीं लग गई है आपको ।
भोलू बोला-----अरे मुझे क्यों लगेगी, अगर नजर लगना ही होगा तो रामलाल कुम्हार को लगेगा, वह काम में सफल भी होता है और उसके पास मुझसे ज्यादा पैसे भी हैं।

उसकी पत्नी बोली ----फिर भी आप किसी साधु महात्मा से मिलकर उनसे पूछ लीजिए। अगर कोई बुरी बला होगी तो वह कोई उपाय बता देंगे।


भोलू का साधु के पास जाना

भोलू ना चाहते हुए भी बीवी की बात मानकर एक साधु के पास पहुंचता है और साधु से बोलता है ---बाबा मैं बहुत तकलीफ में हूँ।


साधु बोला -----क्यों, क्या हुआ तुम्हें अच्छे खासे हट्ठे कट्टे दिखाई दे रहे हो ?
भोलू बोला -----बाबा मैं जो भी काम करता हूं उसमें मेन मौके पर कोई न कोई समस्या आकर खड़ी हो जाती है और मैं सफल नहीं हो पाता।

साधु बोला---- सफलता और असफलता जीवन का तो एक अंग है बच्चे ,इससे घबराना नहीं चाहिए । आज असफलता हाथ लगी है तो कल सफलता भी हाथ लगेगी ।
भोलू बोला -----यही सोच कर तो इतने साल गरीबी में निकाल दिया बाबा, पर सफलता हाथ नहीं लग रही है।
 
उस रामलाल को देखो, मेरी तरह वह भी कुम्हार है। वह भी मिट्टी के बर्तन बनाता है ,मगर हर बार सफल होता है और उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं है ।
    
साधु बोला ----ऐसे कैसे हो सकता है, दोनों एक ही गांव के हो और एक ही धंधा कर रहे हो तो इतना फर्क क्यों?
भोलू बोला -----यही तो मैं भी नहीं समझ पा रहा हूं। मेरी बीवी कहती है --मुझे किसी की नजर लग गई है ।रामलाल के पास ऐसा क्या है जिससे उसको किसी की नजर नहीं लगती और वह सफल हो जाता है ।
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साधु बोला -----ठीक है, कल रामलाल को मेरे पास भेजना। मैं उससे पूछ लूंगा, फिर तुम्हें बताऊंगा ।

दूसरे दिन  भोलू रामलाल  को साधु के पास भेजता है । साधु के पास जाते देख भोलू सोचता है, मुझे इसका पीछा करना चाहिए क्योंकि कहीं यह साधु को बात बता दे और साधु मुझसे छुपा दे।
रामलाल साधु के पास जाकर बोला--- बाबा आपने हमें बुलावा भेजा था । साधु बोला हां, हम जानना चाहते हैं कि गांव के इतने मामूली कुम्हार होकर भी तुम्हारे पास इतने पैसे कैसे हैं।
     
 रामलाल भोला -----बाबा मैं अपने काम में बहुत मेहनत करता हूं ।
साधु बोला -----मेहनत तो सभी लोग करते हैं, तुम्हारे गांव का भोलू कुम्हार भी करता है ,फिर तुम्हारे पास ही इतनी सफलता और इतनी पैसे कैसे कहां से आता है।

रामलाल बोला -----यह तो मुझे भी नहीं पता बाबा। आप तो अंतरर्यामी  हैं, आप पता लगाइए और पता लगा लेना तो मुझे भी बता दीजियेगा, और रामलाल चला जाता है।
तभी भोलू आकर बोला ----उसने क्या बताया बाबा जल्दी से मुझे बता दीजिए ताकि मैं भी सफल हो जाऊं ।
   
साधु बोला----- उसने कुछ भी नहीं बताया ,अगर मुझे पता चला तो मैं तुम्हें बता दूंगा ।
भोलू बोला -----वह बड़ा ढ़ीठ आदमी है ।आप अपने शक्ति से पता कीजिए । तथा मुझे भी बता दीजिएगा।

इस बात के दिन 3-4 दिन बीत जाते हैं, पर साधु बाबा का कोई भी संदेश नहीं आता और ना ही भोलू कुमार अपने काम में सफल होता तो फिर भोलू बाबा के पास पहुंचता है और कहता है ----
   
बाबा चार दिन बीत गए, आपने कोई उपाय नहीं बताया साधु बोला।  उपाय मिल गया है बच्चे पर उसके लिए तुम्हें और रामलाल को मेरा एक काम करना होगा ।
      
भोलू बोला----- कौन सा काम बाबा ? आप बताइए, मैं अकेले ही कर दूंगा।
साधु बोला -----नहीं, कार्य तुम दोनों को करना पड़ेगा।  कल तुम फिर एक बार रामलाल को लेकर मेरे पास आना।  उपाय सुनने के लिए वह बहुत खुश था।
 दूसरे दिन सुबह रामलाल को लेकर बाबा की कुटिया पर पहुंच गया । राम लाल बोला -----आपने आज हमें फिर याद किया बाबा।
      
साधु बोला----- हां, आज तुम्हें शहर के बाजार में लाला भाई की दुकान  पर 50-50 मटके पहुंचाना है  ,वह मेरा शिष्य है और वह तुम्हें पैसे भी देगा और तुम दोनों मुझे पैसा दिखाओगे ।
      
भोलू बोला -----यह तो कोई कार्य नहीं हुआ बाबा, मुझसे कह देते मैं पहुंचा देता । इसके लिए रामलाल को बुलाने की क्या जरूरत थी ?
 साधु बोला -----यह काम तुम दोनों को करना है ,बच्चों जाओ कार्य होने के बाद हमसे मिलना ।
   
भोलू को बाबा के कार्य पर कुछ डाउट लगा लेकिन फिर भी वह घर गया और अपने 50 मटके लेकर शहर की तरफ चल दिया । रास्ते में बोला की मटके पहुंचाकर बाबा से मिलना है और बाबा हमें जरूर अमीर बनने के उपाय बताएंगे ।
वह जैसे ही आगे बढ़ता है उसकी बैलगाड़ी कीचड़ में धंस जाती है और बाहर नहीं निकल पाती ,वह सोचता है कि मटके के वजन की वजह से बैलगाड़ी नहीं खींच पा रही है ।

तभी वहां एक आदमी आता है और बोलता है ----क्यों भाई मटका बेचना है ?
भोलू बोलता है ----नहीं यह मटके लाला भाई की दुकान पर देना है।
     

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आदमी बोलता है---- उनकी दुकान तो 6:00 बजे तक खुलती है अभी 6:30 बज रहे हैं अब तो दुकान बंद हुई हो गई होगी । एक काम करो ₹500 ले लो और यह मटके दे दो।
भोलू बोला----- ढाई हजार के मटके में ₹500 में दे दूं।
आदमी बोलता है ----कि क्या वापस गांव लेकर जाओगे? वापस ले जाकर फायदा क्या होगा ? उससे अच्छा है कि ₹500 ले लो बैलों को चारा -पानी खिलाने का काम आएगा ,बेचारे कितने मेहनत से लेकर आए हैं।
     
भोलू बोलता है ----हां भाई ठीक कह रहे हो गांव जाकर क्या फायदा? लावो ₹500 ही दे दो।
 अपने ढाई हजार मटके को ₹500 में बेचकर गोलू वापस गांव लौट जाता है और रामलाल को लेकर सीधे बाबा की कुटिया में पहुंचता है।

रामलाल बोला ----बाबा आपने कहा था शहर मटके पहुंचाने के बाद आकर मुझे पैसे दिखाना । यह देखिए मेरे 50 मटके के पैसे और भोलू बोला यह मेरे पैसे ।
        
साधु बोला -----तुम्हारे पैसे तो बहुत कम है भोलू ,क्या तुम 50 से कम मटके लेकर गए थे।
भोलू बोला ----नहीं - नहीं मैं 50 मटके लेकर गया था।

साधु बोला---- फिर पैसे इतनी कम क्यों।
भोलू बोलै -----मैंने कहा ना बाबा हमेशा मुझे घाटा ही होता है ,रास्ते में मेरी बैलगाड़ी का चक्का धँस गया। मैं बाजार पहुंचने में लेट हो गया। लाला भाई की दुकान बंद हो चुकी थी, मैं मटके वापस लाकर क्या करता तो ₹500 में एक आदमी को बेच दिया ।
       
साधु ने रामलाल से पूछा ----रामलाल तुम भी तो उसी रास्ते से गए थे, तुम्हारी गाड़ी रास्ते में नहीं धँसी। रामलाल बोला---- बाबा मैं तो बैलगाड़ी लेकर ही नहीं गया था क्योंकि कल शाम को हल्की बारिश हो गई थी।
 इसलिए मैंने सोचा कहीं गांव से शहर का रास्ता खराब हो गया हो ।
इसलिए शहर से आए हुए कुछ लोगों से मैंने पूछताछ की। उन्होंने कहा रास्ते में कीचड़ हो गया है, बैलगाड़ी फँस सकती है।
 मैंने सोचा तब तो बाजार पहुंचने में लेट हो जाऊंगा और दुकान बंद हो जाएगी तो मेरी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। इसलिए मैंने सभी मटके साइकिल पर बांधे और साइकिल के पतले पतले टायर कीचड़ से बचाते हुए मैं शहर पहुंच गया ।

साधु की सीख

साधु बोला----- अब समझ में आया बोला बच्चा यही उपाय मैं तुम्हें बताना चाहता था।
भोलू बोला ----मैं समझा नहीं बाबा। साधु बोला यही जानना चाहते थे ना कि जो तुम काम करते हो वही काम रामलाल भी करता है लेकिन तुम्हारी किस्मत साथ नहीं देती है और तुम्हारा नुकसान होता है , साथ ही गरीबी बना रहता है ।
 भोलू बोला ----हां बाबा ।

                     
                             baba

 साधु बोला---- यही कारण है तुम बिना सोचे समझे कोई काम करते हो, अगर तुमने भी शहर जाने से पहले रामलाल की तरह रास्ते के बारे में सोचा होता , ना तो तुम्हारे गाड़ी का चक्का कीचड़ में फंसता और ना ही तुम लेट होते और ना तुम्हें नुकसान उठाकर अपने मटको को सस्ते दामों पर बेचने पड़ते।
भोलू बोला----- शायद आप सही कह रहे हैं बाबा ।
साधु बोला---शायद नहीं, यकीनन सही कह रहा हूं ।
साधु बोला एक बात हमेशा याद रखना बच्चा जो लोग सफल होते हैं वह हमेशा अलग नहीं करते हैं वह अलग तरह से करते हैं।



आशा है कि आप इस नैतिक कहानी(moral stories in hindi) से सीखेंगे, आप इसे अपने जीवन में लेंगे और इससे बहुत कुछ सीखेंगे। इसी तरह की और भी नई हिंदी कहानियां(hindi kahaniyan new) पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट को बुकमार्क करें और हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें | धन्यवाद!

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