मिटटी में सोना(moral stories in hindi)

इस नई हिंदी कहानी(hindi kahaniyan new) में, मैं आपको बुलंदशहर के किसान के 3 बेटों की कहानी बताऊंगा जिन्हें किसान एक सबक के माध्यम से मेहनती और सफल बनाता है। इस नैतिक कहानी(moral stories ) को पढ़ने से आपको एक नैतिक शिक्षा मिलेगी जो नीचे दी गई है।

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moral stories in hindi


एक किसान के तीन बेटों की कहानी (hindi kahaniyan)


बुलंदशहर में एक आदमी रहता था उसका नाम था पुरुषोत्तम था । वह पेशे से किसान था और उसके तीन बेटे थे, जिनका नाम अजय, विजय और सुजय था।
 लेकिन तीनो के तीनो बेहद निकम्मे और नालायक थे। तीनों कुछ काम नहीं करते थे दिन भर घर पर पड़े रहते थे और सोते रहते थे ।

यह देखकर पुरुषोत्तम एक दिन अपने तीनों बेटों को बुलाया और बोला----- बेटे मेरी तबीयत अब ठीक नहीं रहती, इससे पहले मैं ऊपर चला जाऊं मैं तुम लोगों को एक बात बताना चाहता हूँ।
  पुरुषोत्तम बोले ----देखो बेटा,  मेरे पिताजी बहुत अमीर हुआ करते थे और कई नौकर चाकर भी थे ,लेकिन अब हम इस हालत में आ गए हैं।
उनके बेटे ने बोला ----हां यह सब हम जानते हैं मुद्दे की बात कीजिए

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पुरुषोत्तम जी बोले -----मेरे पिताजी जब यहां आए, उनके पास जितने भी पैसे थे उन्होंने उनको सोने के सिक्के में बदल दिया तथा यही कहीं खेत में अलग-अलग जमीन के अंदर खोद कर रख दिया ।
लेकिन वह सोना न हम खोज सके ना कोई और इसलिए मैं सोच रहा हूं कि मैं कब दुनिया से निकल जाऊं इससे पहले मैं यह राज तुम लोगों को बता दूं ।
 
अगर 3 दिन में सोना नहीं निकला तो ,इस  गेहूं के दाने को बीच खेत में डाल देना और अगले 3 महीने बाद फिर खुदाई करके देखना कहीं सोना ऊपर तो नहीं निकला।
 

पुरुषोत्तम की चार धाम की यात्रा


पुरुषोत्तम जी चार धाम की यात्रा पर के लिए दूसरे दिन निकल जाते हैं, इधर तीनों बेटे खेत में जाते हैं । खेत में जाकर बड़ा बेटा बोला --देखो भाई मैं बड़ा हूं इसलिए जैसा मैं कहूंगा वैसा करना।
   
दोनों छोटे भाई ने कहा ठीक है भाई जैसा तुम कहो। हम तीन लोग हैं हम खेत के अलग-अलग हिस्से में खुदाई करेंगे। जिसे जितना सोना मिलेगा उसे एक जगह इकट्ठा करेंगे और बराबर बराबर बाटेंगे।
     
अजय बोला---- विजय ,तुम पूर्व में खुदाई करो तथा सुजय तुम पश्चिम में खुदाई करो।
 उन्होंने पूछा---- भैया तुम कहां खुदाई करोगे अजय बोला मैं बीच से खुदाई करूंगा तथा तुम दोनों पर ध्यान रखूंगा और तुम लोगों को अच्छा मार्गदर्शक  दूंगा।
तीनो भाई अच्छे से खुदाई करते हैं पहला दिन बीत जाता है ,दूसरा दिन भी बीत जाता है और तीसरा दिन बीत जाता है ।

तीसरे दिन रात में सब बातें करते हैं कि, अरे भाई हम तीनों खेत में 3 दिन से खुदाई कर रहे हैं।लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला । कहीं किसी को पता तो नहीं चल गया था और वह हमारे आने से पहले सोना निकाल ले गया ।
   
अजय बोला---- नहीं- नहीं ,यह बात बाबूजी के अलावा किसी को नहीं पता है। उन्होंने सिर्फ हमें बताया है और क्यों नहीं बताते हम उनके ही तो बेटे हैं।
     
याद है बाबू जी ने क्या कहा था --यदि 3 दिन में सोना नहीं निकलता है तो यह गेहूं के दाने खेत में डाल देना और 3 महीने बाद फिर से खुदाई करना है ।
       
सुजय बोला----- ठीक है हम कल जाकर खेत में खुदाई करके गेहूं के बीज को डाल देंगे।

अगले दिन सुबह तीनो भाई खेत में जाते हैं और खुदाई करते हैं तथा गेहूं के बीज को डाल देते हैं। बीच - बीच में तीनो भाई जाकर देखते रहते हैं कि, कहीं सोना ऊपर तो नहीं आया लेकिन मायूस होकर घर लौट जाते हैं।
     
3 महीने बाद उनके पिता पुरुषोत्तम जी यात्रा से वापस आते हैं । तीनों बेटे पिताजी के पास जाते हैं और अजय बोला --आप आ गए की पिताजी, आपने यह क्या किया।
पुरुषोत्तम जी बोले--- क्या हुआ अजय ?
       
 अजय बोला---- आपने कहा था खेत की खुदाई करो सोना ऊपर आएगा, हमने खुदाई किया कुछ नहीं निकला। आपने बोला था 3 महीने के बीच बीच में जाकर देखना, तब भी सोना नहीं आया।
         
पुरुषोत्तम जी बोले ----कौन कहता है बेटा सोना नहीं आया, तीनों बेटे बोले--- सही में पिताजी हम झूठ नहीं बोल रहे हैं सोना नहीं आया।
पुरुषोत्तम जी बोले--- चलो मेरे साथ खेत में तीनो भाई पुरुषोत्तम के साथ खेत में जाते हैं ।
         
अजय बोला -----देखिए पिताजी विजय ने पूर्व में तथा सुजय ने पश्चिम में खुदाई किया मैंने बीच में खुदाई किया लेकिन कुछ नहीं निकला, लेकिन ये घास इतनी बढ़ गई।
   
पुरुषोत्तम जी बोले--- नहीं बेटा, यही तो है असली सोना। अजय बोला ---यह क्या कह रहे हैं आप, यह हरा भरा घास सोना कैसे हो सकता है?
      
पुरुषोत्तम जी बोले -----मेरे प्यारे बच्चों यहां कोई सोना नहीं है, मैंने कहा था अगर सोना ना निकले तो खुदाई करके इन गेहूं के बीज को खेत में डाल देना और बीच बीच में देखते रहना।  तो बेटा यही वह गेहूं है जो तुमने 3 महीने पहले बोया था और अब यह उग आया है यही तो है असली सोना।
       
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एक बेटा बोला--- लेकिन यह कैसे हो सकता है सोना ,पिताजी ।
पुरुषोत्तम जी बोले ----- अरे बेटा अगर इसे बाजार में बेचोगे तो बहुत रुपए मिलेंगे और तुम्हें कई कारखाने और ठेके भी देंगे, बताओ समझ में आई कि नहीं बात ।
       

पुरुषोत्तम द्वारा अपने बेटों को सिखाएं गए सबक


अजय बोला---- समझ में आ गई पिता जी ,आपने हमें सोने का लालच देकर गेहूं की बुवाई कराई और जिसका फल हमें इस गेहूं में मिला।
        पुरुषोत्तम जी बोले--- तो समझ गए ना बेटा मेहनत का फल हमेशा मिलता है इसलिए मेहनत करना बहुत जरूरी है उसके बाद पुरुषोत्तम जी और उनके तीनों बेटे एक साथ खेती करने लग और हर साल अधिक पैसे कमाने लगे

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सफलता पाने के लिए हमें कड़ी मेहनत जरूर करना चाहिए
उम्मीद है कि आप अपने जीवन में इस हिंदी नैतिक कहानी (moral stories in hindi)से जो सबक सीख चुके हैं, उसे अपने जीवन में अपना लेंगे और कड़ी मेहनत करके सफल होंगे। अधिक नई हिंदी कहानियाँ (new hindi kahaniyan)पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट को बुकमार्क करें और फेसबुक पेज को लाइक करें।धन्यवाद  ! 

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