नौकर बना मालिक(moral stories in hindi)


इस नैतिक कहानी(moral stories ) में आप पढ़ेंगे की कैसे नौकर  अपनी लालच में आकर अपने मालिक के सोने के सिक्के से कुछ दिनों के लिए अमीर बनता है तथा लालच में अंधे होने के कारण पुनः अपनी संपत्ति को देता है। इस कहानी (hindi kahaniyan) को आपको जरूर पढ़ना चाहिए।

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सोनभद्रा गांव में सेठ माखनलाल की ज्वेलरी की दुकान थी। पूरे दिन वहां अपने नौकर भानु के साथ दुकान में लगा रहता । रात होते ही दुकान बंद करके वह अपने नौकर के साथ घर आता और अपनी बीवी को बोलता--- यह लो मंजू आज की कमाई मंजू बोली---- अरे वाह आज आप की ढेर सारी कमाई हुई और अपनी सारी कमाई अपने बीवी के साथ गिनता। पूरे 130 सोने के सिक्के हैं,
सेठ बोला----- अब लाओ मुझे दे दो ,तुमने अपने सुभ हाथों से गिन लिया।
नौकर मालकिन से पूछता है---- मालकिन मालिक रोज सोने के सिक्के लेकर कहां निकल जाते हैं ?
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मालकिन जोर से बोलती है----- तुमसे मतलब, नौकर है नौकर की तरह रह।  यह सुनकर नौकर चुप रह जाता है।  मगर यह बात उसके दिल में लग जाती है।
रात भर उसे नींद नहीं आती वह सोचता रहता है। कब तक मैं नौकर रहूँगा, मेरे पास भी मालिक की तरह दुकान होनी चाहिए। मगर कैसे?  मेरे पास इतने पैसे कहां से आएंगे और मालिक हैं कि सारे पैसे पता नहीं कहां और क्यों रख आते हैं।
घर पर क्यों नहीं रखते मुझे पता करना होगा। और दूसरे दिन जैसे ही माखनलाल अपने पूरी कमाई के सोने के सिक्के लेकर घर से बाहर निकलता है, नौकर उसका पीछा करता है और देखता है---- माखनलाल एक पेड़ के नीचे, एक लोहे के घड़े में सारे सोने के सिक्के भरकर जमीन में गाड़ रहा है।
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वह मन ही मन कुछ फैसले करता है  और सेठ के जाते ही जाकर सारे सिक्के खोदकर निकाल लेता है। दूसरे दिन सेठ माखनलाल दुकान पर पहुंचता है, काफी देर हो जाती है पर उसका नौकर नहीं आता है और वह परेशान हो जाता है ।
तभी रामलाल आ जाता है और कहता है ------जरा चांदी की एक अंगूठी दिखाना। सेठ खोजने लगता है । रामलाल बोला----- कितना समय लगा रहे हो सेठ, जल्दी करो।

माखनलाल बोला -----क्या बताऊं रामलाल, वह मेरा नौकर माल पता नहीं कहां रखकर चला गया है और आज आया भी नहीं ।
रामलाल बोला---- वह कैसे आएगा वह तो खुद की दुकान संभाले बैठा है। आपका नौकरा है ,आपको ही नहीं पता । गांव की नुक्कड़ पर वह अपनी दुकान खोल रखा है। 


नहीं मिल रही तो रहने दो मैं आपके नौकर की दुकान से ले लूंगा। सेठ सोचने लगता है---- कि कमाल है ! भानु ने रातों-रात दुकान खोल ली लेकिन मुझे नहीं बताया।
सेठ तुरंत भानु की दुकान पर जाता है और भानु सेठ को देखकर पूछता है ---सेठ जी आप।
  
सेठ बोला---- भानू तूने मुझे बताया नहीं कि तुम अपनी दुकान खोल रहा है ,यह तो बहुत बड़ी खुशी की बात है।
भानु बोला---- धन्यवाद सेठ जी ।

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सेठ बोला----- पर इतना पैसा तुम लाया कहां से ?
भानु बोला -----लॉटरी लगी सेठ जी ।

सेठ बोला----- किस्मत वाले हो तुम ।
भानु बोला------ किस्मत वाला तो हूँ ही सेठ जी ,तभी तो आप जैसा मालिक मिला । आप की दुकान कैसी चल रही है ?
सेठ बोला----- तुम नहीं थे तो समझ में नहीं आ रहा है कहां क्या रखा है। यह कह कर सेठ वहां से चल चल जाता है ।
तभी उसे बाहर सेठ कुन्दनलाल मिलता है और कहता है -----सेठ जी लगता है अपने नौकर को बधाई देने आए थे।
सेठ ने कहा---- हाँ, कह रहा था लॉटरी लगी है ।
कुन्दनलाल ने कहा----- लॉटरी नहीं सेठ जी, सोने के सिक्के कहीं से लेकर आया था । उसी को रख कर मैंने ही तो उसे कर्ज दिया है ।

सेठ बोला ----सोने के सिक्के ! वह तो कह रहा था लॉटरी लगी है।
कुन्दनलाल बोला---- एक साथ चार पांच सौ सोने के सिक्के मिल जाना भी लॉटरी लगना ही तो है।
 
माखनलाल दिनभर दुकान पर बैठकर ,रात को अपनी बीवी के साथ बैठकर, दिन भर की कमाई गिनता है।  साथ में भानु के बारे में बताता है और अपने सारी कमाई लेकर पेड़ के नीचे रखने चला जाता है।

जैसे ही वह खोद कर देखता है -----तो उसके घड़ा खाली होता हैं।  वह हड़बड़ा जाता है और सोचने लगता है कि उसके सारे सिक्के कहां गए और घबराया सा वापस आकर वह अपनी बीवी को बताता है ।

यह सुनकर पत्नी भी हैरान रह जाती है । सेठ की पत्नी बोली----- ऐसा कैसे हो गया हमने तो किसी को बताया भी नहीं कि हम वहां धन गाड़ते हैं ?
सेठ बोला -----पता नहीं बड़ी मुश्किल से 400 से 500 सिक्के जमा किए थे ,सब चोरी हो गए।
उसकी बीवी पूछती है---- कि पर चोरी कौन कर सकता है ?
   
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सेठ कहता है ------यही तो नहीं पता।
सेठ की पत्नी बोली----- जिसने भी चोरी की होगी उसकी तो लॉटरी लग गई पर आपकी तो कमाई चली गई ।
 
तभी सेठ बोला क्या कहा तुमने जिसने चोरी की उसकी लॉटरी लग गई ? भानु भी यही कह रहा था उस की लॉटरी लगी है।
कुंदन सेठ जो व्यक्ति मिला था ,कह रहा था उसके पास 400 - 500 सिक्के थे । जिसे रखकर उसने ही उसे कर्ज दिए हैं।

सेठ की पत्नी बोली -----तब तो उसी ने चोरी किया होगा, उसे पता चल गया होगा कि आप वहां धन गाड़ते हैं। चलिए अभी दो कनपटी बजाते हैं, सभी सच्चाई बता देगा।

सेट बोला ----नहीं ऐसे नहीं  बताएगा ।
सेठ की पत्नी बोली ---तो क्या करें, मेहनत की कमाई थी ।
सेठ बोला---- नहीं -नहीं कुछ और तरीका अपनाना पड़ेगा ।

अगले दिन सेठ नौकर के दुकान पर जाता है, नौकर सेठ को देखकर कहता है --- सेठ जी आप।
 सेठ कहता है ------हां भाई! मैं तुझे तेरी मालकिन की तरफ से बधाई देने आया हूं । वह चाहती है तुम और भी बड़ा सेठ बन जाओ। तेरी मेहनत से खुश होकर वह एक राज की बात बताने को कहा है जो मैंने आज तक नहीं बताई थी ।
 
वरना तुम कब का सेठ बन जाता। नौकर बोला -----कौन सी राज की बात?

फिर सेठ बोला ------पहले मुझे एक तपस्वी ने सोने का सिक्का दिया था। कहा था इसे एक जगह पर गाड़ देना यह दुगना हो जाएगा ।मैं उसे रोज ले जाकर रात को गाड़ देता । वह दुगना हो जाता फिर दूसरी रात उसे फिर गाड़ देता और फिर वह दोगुना बढ़ जाता। इस तरह मेरे पास कई सोने के सिक्के हो गए।

नौकर बोला----- कमाल है सेठ जी! आपने मुझे यह बात कभी बताई नहीं।
सेठ बोला ----अभी भी नहीं बताता ,पर तुम्हारी सेठानी  ने जिद किया तो बताने आ गया।
लेकिन अब मेरे पास एक भी सिक्के नहीं है ,वह खो गए हैं। काश हमारे पास होते तो मैं तुम्हें बधाई के तौर पर दे देता और तुम भी सिक्के पर सिक्के बनाते रहते।

तुम्हारी तो लॉटरी लग गई है तुम्हें ऊपर वाला और भी देगा ,अगर तुम्हारी मालकिन पूछेगी तो तुम बता देना कि मैं तुम्हें बताया था, वरना वह नाराज हो जाएगी।
   
सेठ के जाने के बाद नौकर सोचने लगा ----वाह सेठ जी! आपने फिर गलती कर दी। पहली बार गलती की कि ,आप हमें नहीं देख पाए कि मैं देख रहा हूं कि -आप सोने के सिक्के जमीन में गाड़ रहे हैं और आज आप दूसरी गलती कर दी की यह राज की बात हमें बता दी।
 अब मैं एक नहीं एक साथ 500 सिक्के गाढ़ कर रात- भर में हजार कर लूंगा।

नौकर  कुंदन  एक दिन के लिए सिक्के लेकर चुपचाप वही पेड़ के नीचे गाड़ देता है और उसे पता भी नहीं कि उसे ये करते हुए सेठ माखनलाल देख रहा है।
उसके जाते ही सेठ माखनलाल आता है और सारे सिक्के निकाल कर ले जाता है । बीबी सारे सिक्के आते देख अपने पति के चतुराई पर खुश हो जाती है।
         

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दूसरे दिन माखनलाल अपने दुकान पर बैठा रहता है, तभी रामलाल आता है--- लाइए सेठ जी, उस दिन जो चांदी की अंगूठी लेने आया था वह दे दीजिए।
सेठ बोला---- वह तो तुम भानु की दुकान से ले गए थे ना।

रामलाल बोला -----आपको नहीं पता, भानु की दुकान पर सेठ कुंदन लाल ने कब्जा कर लिया है। वह आकर हमारी अंगूठी भी ले गया । तभी रोते हुए उसका नौकर आता है और कहता है ---आपकी बात तो गलत हो गई ।
      
सेठ कहता है -----कौन सी बात?
नौकर कहता है -----आपके कहने पर हमने अपने सारे सिक्के पेड़ के नीचे गाड़ दिए थे की दुगनी हो जाएंगे पर वह तो गायब हो गए।

सेठ बोला----- गायब नहीं हुए हैं, जिसके थे उसके पास चले गए हैं ।
     
नौकर रो कर माफी मांगने लगता है ,कहता है ---मैंने आपके साथ धोखा किया था। ये आप ही के सिक्के थे।

सेठ बोला ----हां अब वह मेरे पास है ।
नौकर कहता है----- आपको पता था कि मैंने आपके सिक्के चुराया है फिर भी आपने मुझे कुछ नहीं कहा ।
        
सेठ बोला------ अगर कह देता तो तु वापस नहीं करता।
 किंतु तुम्हें देखकर मैं समझ गया था तुम्हारे दिमाग में लालच कुछ इस तरह भरा हुआ है कि तुम समझ नहीं पाएगा कि ,अगर मैं रोज अपने सिक्के गाड़ने के लिए जाता हूं तो मुझे पता चल गया होगा की मेरे सिक्के खो गए है और मैं तुमसे झूठ बोल रहा था।
         
एक बात याद रखना भानु एक इंसान की मेहनत की कमाई हुई रकम उससे कभी कोई भी नहीं छीन सकता।

हम इस कहानी से सीखते हैं कि हमें धोखा देकर पैसा नहीं कमाना चाहिए, क्योंकि हम अपने कमाए हुए पैसे को लंबे समय तक छिपा नहीं सकते हैं, इसलिए हमें कड़ी मेहनत करके ईमानदारी से कमाई करनी चाहिए।

मुझे उम्मीद है कि आपको यह कहानी पढ़ने में मज़ा आया होगा और आप इस नैतिक कहानी (moral stories in hindi)से निश्चित रूप से सीखेंगे और हमेशा ईमानदारी और कड़ी मेहनत से खुद को सफल बनाएंगे।
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