पैसे देने वाला जादुई कूलर (paise dene wala Jadui kular hindi kahani) | New Jadui kular

आज आप इस नई जादुई  कहानी (new jadui kahani) में , एक जादुई कूलर तथा रामु नाम के हलवाई के बारे में पढ़ेंगे जिसमे जादुई कूलर(jadui kular) की मदद से रामु एक सफल हलवाई तथा एक नेक इंसान बन जाता है। आगे की कहानी आप खुद ही पढ़े।
paise dene wala Jadui kular
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रामु हलवाई के मिठाई की प्रसिद्ध दुकान (jadui kahani)


रामू हलवाई मलकापुर गांव में अपनी पत्नी और अपने बच्चों के साथ में  रहता था । रामू सुबह को जलेबीया तोलता है और शाम को समोसे बनाता ।

वह जलेबी और समोसे के साथ में मिठाइयां भी बेचता था। शाम में उसका बेटा गोलू और उसकी बेटी नीलू दुकान पर आ जाया करते ।

नीलू बोलती है -----पिताजी, आज गोलू के सिर पर कव्वे ने पॉटी कर दी ।
तभी गोलू बोलता है -----पिताजी आज स्कूल में मैडम ने नीलू की चोटी पकड़कर खूब पिटाई की। नीलू अपने दोस्तों के साथ क्लास में पीछे बैठकर फैशन शो देख रही थी ।

नीलू बोलती है ----पिताजी यह झूठ बोल रहा है।

रामू बोलता है---- अब तुम दोनों लड़ना बंद करो और घर जाकर अपनी मां से कहना -रसगुल्ले की चाशनी बनाकर तैयार रखें।

नया कूलर (new jadui kular)


 शाम को जब रामू घर पहुंचता है तो देखता है कि, उसकी पत्नी घर पर बेसुध पड़ी है । बच्चे उसके ऊपर हवा कर रहे हैं ।

रामू बोलता है ----अरे! तुम अभी  चासनी नहीं तैयार की। अरे भाई ! सेठ जी के यहां से पांच किलो रसगुल्ले का ऑर्डर आया है।

 उसकी पत्नी बोलती है--- गर्मी के मारे बुरा हाल हो रहा है। कितने दिन से कह रही हूं कि एक कूलर(kular) ले आना। बिना कूलर के मुझसे काम नहीं होगा ।
रामू को मजबूरन एक कूलर खरीद कर लाना पड़ता है।


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गोलू बोलता है---- मैं कूलर के सामने सोऊंगा तभी नीलू बोलती है---- तेरा कच्छा उड़ जाएगा रहने दे ,मैं कूलर के सामने सोंउगी।
अब रामू की पत्नी कूलर(kular) की हवा में आराम से चाशनी तैयार करती ।

एक दिन पड़ोस वाली पिंकी रामू के घर आती है और बोलती है ----भाभी जी घर पर ससुराल से थोड़े मेहमान आ गए हैं। हमारी चीनी खत्म हो गई है थोड़ी सी चीनी दे दीजिए ,मैं कल वापस कर दूंगी।

कोई बात नहीं है मैं अभी लाती हूँ तुम बैठो। पिंकी को रामू के घर नया कूलर(new kular) आया देखकर ,बहुत जलन होती है।

पिंकी बोलती है----- हम अपने यहां गर्मी से मरे जा रहे हैं और यहां लॉट साहिबनी कूलर की हवा ले रही है ।

तभी रामू की पत्नी चीनी लेकर आती है और कहती है----ये लो चीनी और बढ़िया से चाय बनाकर मेहमानों को पिलाना।

 रात में जब मेहमान चले जाते हैं तो पिंकी अपने सास से कहती है ----अम्मा जी, रामू के घर कूलर आ गया है । पूरे गांव भर में किसी के पास कूलर नहीं है ।

उसकी सास बोलती है---- यह रामू कभी हमारे घर  पर नौकर हुआ करता था । अब तो खूब कमाई कर रहा है मिठाई बेचकर।

रामु की दुकान का अंत( jadui kular hindi kahaniyan)

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 तू ऐसा कर, जब कल चीनी वापस लौटाने जाए तो चीनी में मच्छर मारने वाला स्प्रे छिड़क देना।

 अगले दिन पिंकी चीनी में खूब मच्छर मारने वाला स्प्रे  छिड़क देती है और रामू की पत्नी के पास चीनी वापस देने जाती है ।

और कहती है ----लीजिए भाभी जी चीनी ,रामू की पत्नी उस चीनी का प्रयोग जलेबी की चाशनी  बनाने में कर लेती है।

 अगले दिन हमेशा की तरह रामू की दुकान पर जलेबी खरीदने वालों की भीड़ लगी रहती है । लोग खूब जमकर जलेबीयां  खाते हैं ।

जलेबियां खाते ही लोगों की तबीयत बिगड़ जाती है। लोगों को उल्टी और दस्त होना शुरू हो जाता है । तभी एक आदमी कहता है---- रामू तूने जलेबी हमें क्या मिला दिया?

 तभी दूसरा बोलता है -----इसने हमें जान से मारने की कोशिश की  है ,इसे मारो ।

इसलिए ग्राम के लोग रामू की खूब पिटाई करते है। उसके दुकान तोड़ देते हैं और मिठाई वगैरह सब फेंक देते हैं।

रामू को हॉस्पिटल में एडमिट  करना पड़ता है।
डॉक्टर रामू की पत्नी से कहता है ---तुम्हारे पति की रीढ़ की हड्डी टूट गई है।  रिकवर होने में समय लगेगा।

कूलर निकला जादुई कूलर(paise dene wala jadui kular)


 रामू का सारा धंधा चौपट हो चुका था । रामू की पत्नी को घर चलाना भी मुश्किल पड़ रहा था । गोलू और नीलू की पढ़ाई भी छूट गई।

 गोलू बोलता है ----मां मैं आइसक्रीम लेने जा रहा हूं ,यह मुझे अपनी पॉइंट में मिला ।
 उसकी मां बोलती है ---इधर ला ₹10 , सब्जी आएगी इसकी, आइसक्रीम नहीं ।

गोलू बोलता है ----मैं नहीं दूंगा।
रामू की पत्नी बोलती है ----देगा कैसे नहीं , गोलू की मां गोलू को पकड़ने दौड़ती है और ₹10 का नोट उड़कर कूलर के पीछे से कूलर में चला जाता है और कूलर के आगे से  हजारों नोटों की बौछार हो जाती है।

 नीलू बोलती है--- यह कैसे हुआ ?
 नीलू  एक सौ का नोट निकालकर लाती है और कूलर के पीछे डाल देती है और आगे से हजारों 100 के नोट निकलते हैं।

 गोलू बोलता है ----लगता है यह जादुई कूलर है । पीछे से  एक नोट डालो और आगे से हजारों नोट निकलने लगते हैं।
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 वे लोग जादुई कूलर से ₹100000 इकट्ठे करके, दिल्ली के एक अच्छे हॉस्पिटल में एडमिट कर देते हैं।

रामू कुछ महीनों में स्वस्थ होकर घर लौट आता है और कहता है--- हमे जादुई  कूलर की वजह से लालच में नहीं पड़ना चाहिए, भले ही हमें जादुई कूलर हमारे पास है।

लेकिन फिर भी मैं हलवाई की दुकान दोबारा खोलूंगा और मेहनत से पैसे कमाउंगा।

लालची पड़ोसी(lalchi padosi hindi story)


जादुई कूलर(jadui kular) की बात पींकी और उसके सास को पता लग जाती है।
पिंकी बोलती है ----अगर वह कूलर हम चुरा ले तो मजा ही आ जाए।

 एक दिन जब रामू का परिवार सो रहा था तो पिंकी और उसकी  सास रामू के घर में गए औए कूलर को चुरा लाई।

 उसकी सास बोलती है ----जल्दी से पैसे उसमें डालो और हम अमीर हो जाएंगे एक ही रात में ।
 पिंकी पीछे से कूलर में कई सारे नोट डालती है और आगे से गर्म हवा  निकलती है । पिंकी और उसके सास के मुंह जल जाते हैं।

 उसकी सास बोलती है--- लगता है तुमने कोई गड़बड़ कर दी , फिर से डाल पैसे ।
 पिंकी दोबारा से कूलर में पैसे डाल देती है , कूलर से आवाज आती है---- मैं लालची लोगों की मदद नहीं करता।

 तूने अपने लालच(lalach) को पूरा करने के लिए मेरा इस्तेमाल किया है,अब परिणाम भुगतो ।

कूलर से तीर निकालने लगते हैं और पिंकी बोलती है ---भागो।
पिंकी और उसकी सास भागते हैं और फिर उनके पीठ में तीर लग जाते हैं।

अगले दिन पिंकी परेशान होकर रामू के घर कूलर वापस ले आती है और वह बोलती है ----माफ कर दीजिए भाभी जी। मैंने आपका जादुई कूलर चुराया और उसका परिणाम भी भुगता।

नैतिक सीख(moral lesson)

 तभी तो कहते हैं लालच बुरी बला है।

यह जादुई कहानी (jadui kahani)आपको कैसी लगी comment करके जरूर बताइये।

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कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद! अच्छा पढ़े-अच्छा सीखे।

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